Tuesday, 22 September 2020

Bhutiya kahani, भूतों की कहानिया - चुड़ेल महिला और सायकल

 

ये कहानी है सीतापुर गांव की. सीतापुर गांव के मुखिया के बेटे की शादी का दिन था और रात में गांव में नाच गाने का समारोह था.

मुखिया ने अपने बेटे के शादी में नाच गाने के लिए रामपुर के फेमस बैंड वालोंको बुलाया था.

रामपुर के बैंड वाले अपने सब सामान हर एक व्यक्ति की सायकल पे रखकर शाम ७ बजे निकलते है. रामपुर और सीतापुर में अंतर महज ६ किलोमीटर का था.

सर्दी के दिन थे. इसलिए हर बैंडवासी स्वेटर और गले में मफलर पहने हुआ था. अँधेरी रात में ये सायकल चलाते सीतापुर गांव में जा रहे थे.

सीतापुर और रामपुर के बिच जंगल था और उन दोनों गांव की सिमाये एक जंगल से जाती हुई नदी पर सटी हुई थी. दोनों गांव में आने जाने के लिए नदी पर पुल था.

रात के करीब ८ बजे बैंड वाले सीतापुर गांव में पहुंचते है. नाच गाने का समारोह रात में करीब ९ बजे चालू हुआ और रात में करीब १ बजे तक चला.

सीतापुर के मुखिया बैंड से बहुत खुश हुए और उन्होंने जो रकम तैय की थी, उससे भी ज्यादा रकम बैंड वालों को दी. बैंड वाले सभी बहुत खुश हुए और मुखिया का आभार प्रकट करते हुए फिर से सामान अपने सायकल पर फिट करने लगे.

सीतापुर से निकलते उन्हें करीब रात के १.३० बज गए. सभी लोग बैंड बजाते बजाते थक चुके थे. सायकल चल रही थी और साथ में रात के सन्नाटे में कीड़ो की आवाज भी बहुत डरावनी लग रही थी.

जंगल का रास्ता, दूर दूर तक किसी इंसान की आवाज भी नहीं। सब आपस में बातें कर रहे थे और सायकल चलाकर अपना रास्ता काट रहे थे.

अचानक एक महिला की रोने की आवाज आने लगती है. सभी बैंड वाले इस बारे में सोचते हैं कि इस समय कौन रो रहा है। जंगल का सुनसान रास्ता और रोने की आवाज। हर कोई हैरान है। सीतापुर गाँव सिर्फ 2 किमी पीछे था।

रोने की आवाज जोर से आने लगती है. वैसे सभी लोग सायकल तेज़ चलाते है. आखिर उन्हें रोड के बाजु में एक महिला रोती हुई दिखती है. उस महिला को देखकर हर कोई दंग रह जाता है. इतने सुनसान रस्ते और जंगल में एक महिला रो क्यों रही है ?

सभी लोग उस महिला के पास रुकते है. महिला रोते ही रहती है. बैंड पथक में जो सबसे बुजुर्ग आदमी उस महिला से पूछता है '' बेटी, तुम रो क्यों रही ही और इस सुनसान जगह पर क्या कर रही हो ?''

रोती हुई महिला कहती है '' मेरे गांव सीतापुर है, मेरे पति ने मुझे बहुत मारा, वो मुझे जान से मार देता पर मैं वहाँ से भाग आयी ''

आदमी बोलता है '' बेटी, तुम फिर यहाँ रुकी कैसी और तुम्हे कहा जाना है ?

महिला बोलती है '' मैं भागते भागते थक गयी और मुझमे अब शक्ति नहीं की मैं आगे जा सकू,  मेरा गांव रामपुर के पास रंजनगड है. मैं वहाँ मेरे माँ-पिताजी के पास जाना चाहती हु'' 

सभी लोग मुश्किल में फंस जाते है. घर जाने के लिए लेट हो रहा था और इस महिला को अकेला छोड़कर कैसे जाये ? इस दुविधा में सब पड़ गए.

आखिर बुजुर्ग बोलता है '' बेटी, तुम हमारे साथ चलो, रामपुर से पहले तुम्हारा गांव आता है, हम तुम्हे गांव में छोड़ देते है''  इतना कहकर बुजुर्ग एक आदमी को इसे सायकल पे बिठाकर साथ लेने को कहता है.

आदमी के सायकल के पीछे सामान होने की वजह से वो उस महिला को सायकल के आगे वाली रॉड पर बैठा लेता है. महिला सायकल पे बैठती है. वक़्त करीब रात के २.३० बज रहे होते है.

रात ज्यादा होने की वजह से सभी लोग एक दूसरे के साथ सायकल चला रहे होते है. महिला अब शांत बैठी हुई होती है. सभी लोग चलते रहते है, तभी रस्ते में एक कुत्ता उनपर भोंकने लगता है. रात होने की वजह से उस कुत्ते पर कोई ध्यान नहीं देता। 

कुत्ता अजीब अजीब तरह से भोंकने लगता है. उसकी अजीब भोंकने की वजह से महिला के चेहरे पर हंसी आती है. जिस आदमी की सायकल पर महिला बैठी हुई रहती है, वो आदमी सभी लोंगो को बोलता है '' भाइयों, सायकल चलाते वक़्त अब थोड़ा वजन महसूस हो रहा है. '' सभी लोग महिला बैठी है उस वजह से उसे कहते है की तुम डबल सीट बैठे हो, इसलिए तुम्हे ऐसा लग रहा है.

रामपुर और सीतापुर गांव के बिच में जो नदी बहती है वो नजदीक आने लगती है. नदी के पानी का आवाज अब साफ सुनाई देता है. जैसे जैसे नदी पे बना हुआ पुल पास आता है, वैसे वैसे उस आदमी को सायकल चलाने में दिक्कत आती है.

उसे नदी के पानी के आवाज के साथ और दूसरी आवाज आने लगती है. उसे समझ में नहीं आता की दूसरी आवाज कहा से आ रही है. वो आगे बैठी महिला को देखता है तो वो शांत बैठी रहती है. सायकल और ज्यादा चलाने में मुश्किल आने की वजह से वो बाकि लोंगो को बोलता है '' भाइयों, यहाँ थोड़ी देर रुकते है. थोड़ा आराम करने के बाद आगे चलते है ''

बाकि सभी लोग रुकने के लिए सायकल धीमी कर देते है. वो आदमी भी सायकल धीमी कर देता है. सायकल धीमी करते वक़त सायकल के पैडल पर उसकी नजर पड़ती है तो वो निचे का नजारा देखकर घबरा जाता है. उसके मुंह से आवाज बाहर आती नहीं।

महिला के पैर जमींन पर रेंगते देखकर वो डर जाता है. महिला के पैर बड़े होते रहते है. अब उसे समझ में आता है की वो दूसरी आवाज कहा से आ रही थी और उसे सायकल चलाने में इतनी मुश्किल क्यू आ रही थी ?

वो आदमी पूरी ताकद लगाकर उस महिला को सायकल के निचे धकेल देता है. वो जोर से चिल्लाकर कहता है '' भाइयों, रुको नहीं , सायकल जोरों से चलाओ और पीछे मत देखो'' उसका ऐसा चिल्लाना देखकर सभी लोग सायकल तेजी से चलाने लगते है.

पीछे वो महिला जोरों से रोती है और मुझे भी लेकर जाओ ऐसा कहती है. उसकी आवाज आने के बाद आदमी बोलता है '' कोई रुको नहीं, वो चुड़ैल है, सबसे पहले इस नदी का पुल पार करो. उसे कोई जवाब मत दो ''

महिला उनके पीछे भागने लगती है. अब रोने की जगह वो जोरों से हंसती है. उसकी भयानक हंसी सुनकर सभी के पसीने छूट जाते है. सभी लोग सायकल और तेजी से चलाने लगते है. नदी के पुल पर आते ही उन सभी लोंगो को ऐसा महसूस होता है की कोई आग पीछे से लगी हो.

महिला चुड़ैल आखिर एक के सायकल को पकड़ने ही वाली थी, उसके हात में सायकल का पीछे लगा हुआ सामान आता है. वो सायकल पे बैठा हुआ आदमी चिल्लाता है और पूरी जान लगाकर सायकल जोरों से भगाने लगता है. आखिर कर सभी लोग नदी का पुल पार कर लेते है.

सभी लोग नदी का पुल पर करते ही पीछे से जोर का आवाज आता है '' बच गए तुम सभी लोग, आज मैं तुम सबका खून पी जाती, तो मेरी भूक मिट जाती। इस गांव की सिमा की वजह से तुम बच गए''

ऐसा सुनते ही सभी लोग आगे जाकर पीछे मुड़कर देखते है तो नदी के पुल पर एक बड़ी सी आग उन्हें दिखाई देती है. सभी बैंड वाले थके हुए रहते है और मन ही मन में भगवान का आभार मानते है. क्यों की आज उनका सामना उनके मौत से हुआ था.

ये कहानी इंग्लिश भाषा में पढ़ने के लिए यहाँ क्लीक करे...

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