Thursday, 17 September 2020

अकबर बीरबल की कहानी - बेहोश लड़के ने बताया, चोरी किसने की ?

एक गरीब आदमी काशी यात्रा करने के लिए घर से निकलने के बाद दिल्ली पहुँचता है. दिल्ली में उसे रात हो जाने की वजह से वो एक रोड के पास अपरिचित घर के सामने खड़ा होकर आवाज देता है.

आवाज देते ही घर का मालक बाहर आता है. गरीब आदमी उसे अपने काशी यात्रा के बारे में बताता है और आज रात के लिए विश्राम करने के लिए जगह देने की विनती करता है.

घर का मालिक दयावान रहता है और उस गरीब आदमी को अपने घर के एक कमरे में जगह देता है, साथ में उसे खाना भी खिलाता है.

उन दिनों दिल्ली में डकैती की वारदात हर दिन होती रहती थी. सरकार ने डकैती रोकने के लिए ज्यादा पुलिस भर्ती की थी. पर उन पुलिस में से एक पुलिस डकैती करकर अपना घर चलाता था।

वो पुलिस चोर आज गरीब आदमी सोता है उसी घर में डाका डालने के लिए जाता है. गरीब आदमी सोया था उसी कमरे में एक बड़ी पेटी रखी हुई थी. पुलिस चोर वो पेटी लेकर भागने ही वाला था तब अचानक से कुछ आवाज आने की वजह से गरीब आदमी की नींद खुलती है और वो पुलिस चोर का पैर पकड़ लेता है.

पैर पकड़ने की वजह से पुलिस चोर भागने में असमर्थ होता है. वो गरीब आदमी से कहता है, तुम मुझे छोड़ दो मैं तुम्हे इस पेटी के अंदर जो भी पैसे निकलेंगे उसमे से आधा हिस्सा दूंगा। ये सुनकर भी गरीब आदमी उसके पैर नहीं छोड़ता।

पैर छोड़ने की काफी कोशिश करने के बाद पुलिस चोर जोरों से घर मालिक को आवाज देता है और कहता है '' जल्दी आओ, ये आदमी तुम्हारी पेटी लेकर भागने ही वाला था तो मैंने उसे पकड़  लिया'' ये सुनकर घर मालिक पुलिस चोर की बात सच मानता है और गरीब आदमी की पुलिस कंप्लेंट करता है.

गरीब आदमी पर पुलिस कंप्लेंट हो जाने की खबर बीरबल तक पहुँच जाती है. बीरबल उस गरीब आदमी और पुलिस चोर को राजा अकबर के दरबार में बुलाता है. उन्हें दरबार में बुलाने से पहले बीरबल अपने विश्वासु आदमी को एक काम करने को बोलता है.

गरीब आदमी और पुलिस चोर दरबार में पहुँचने के बाद बीरबल ने बताया हुआ विश्वासु आदमी अंदर आता है और बीरबल से कहता है '' बीरबल जी, मैं और मेरा बेटा हम नजदीक के मंदिर में जाकर दर्शन करते वक़्त मेरा बेटा बेहोश हो गया, प्लीज् आप उसे जल्दी से यहाँ लाये, मैं उसे अकेला यहाँ ला नहीं सकता'' 

तभी बीरबल कहता है '' अच्छा, तुम मत जाओ, मैं पुलिस और इस गरीब आदमी को तुम्हारे बेटे को लेने के लिए भेजता हूँ '' पुलिस चोर और गरीब आदमी मंदिर पहुँचते है, लड़के को बेहोश देखकर गरीब आदमी उसके मुँह पर कपडा डालता है और पुलिस चोर के साथ उसे उठाकर दरबार में लाने का प्रयास करता है.

दरबार में लाते वक़्त गरीब आदमी उस पुलिस चोर को कहता है '' आपने बहुत गलत किया, मुझ जैसे गरीब आदमी को चोरी के जुर्म में फसाया''

ये सुनकर पुलिस चोर कहता है '' तुम्हे तुम्हारी प्रामाणिक स्वाभाव के कारन फसाया है, अगर तुम जब मैं तुम्हे चोरी का आधा हिस्सा देने के लिए राजी था, तभी भी तुमने मेरा पैर नहीं छोड़ा, अब भुगतो तुम तुम्हारी सजा, बहुत दिनों के लिए अब तुम जेल जाओगे ''

दोनों भी दरबार में आते है. लड़के को बेड पर लेटाकर बीरबल दोनों को फिर से पूछता है की आखिर चोरी किसने की है ? पुलिस चोर कहता है '' मैंने इसे चोरी करते वक़्त पकड़ा है'' 

पुलिस चोर ने ये बीरबल से कहाँ तभी बेहोश हुआ लड़का बोलता है '' चोरी इस गरीब आदमी ने नहीं की है बल्कि इस पुलिस ने की है, आते वक़्त मैंने दोनों की बातें सुनी''

अब पुलिस चोर को सब समज में आता है, बीरबल ने ही इस लड़के को बेहोश होने का नाटक करने को बोला होगा। पुलिस चोर बीरबल से क्षमा मांगता है. बीरबल सिपायों को आदेश देता है की इस पुलिस चोर को जल्दी से पकड़ कर जेल में डाल दो.

बीरबल की चतुराई की वजह से गरीब आदमी को न्याय मिला। गरीब आदमी बीरबल को धन्यवाद करके अपने काशी यात्रा के लिए प्रस्थान करता है. 

ये कहानी इंग्लिश भाषा में पढ़ने के लिए यहाँ क्लीक करे ...

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